ऋतु वसंत की चलकर आई
राग-रंग संग होली लाई
वसंत पंचमी ने पुकार लगाई
फा़ग-धमार ने साज सजाई
खेतों में सरसों लहराए
बालियाँ गेहूँ की इठलाए
पाप-बुराई का दहन होलिका
नारद, भविष्य पुराण बताएं
हिरण्यकश्यप की बहन होलिका
अग्नि मंडप का खेल रचाए
बैठ गई संग भक्त प्रभू के
खुद ही जलकर भस्म हो जाए
प्रहलाद वह भक्त प्रभू का
बुराई का अंत करना बतलाए
बैर-उत्पीड़न की प्रतीक होलिका
प्रेम-प्रतीक को छू भी न पाए
शिव-गण भोले बारात ले जाएं
राधा कृष्ण संग रास रचाए
कारण होली हर वर्ष मनाए
कृष्ण ने पूतना को मार गिराया
ग्वाले-गोपियों ने रंग उड़ाया
धुलिवंदन संग होली मनाया
प्रकृति का यौवन भी रंग लाया
धार्मिक निष्ठा और मनोरंजन है
भारतीय समाज का यह संगम है
ईष्या-द्वेष सब मिट जाते हैं
बिछड़े बन्धु जन मिल जाते हैं
अद्भुत ऋतु गाथा बतलाता
रितेश सभी संग होली मनाता ।।
राग-रंग संग होली लाई
वसंत पंचमी ने पुकार लगाई
फा़ग-धमार ने साज सजाई
खेतों में सरसों लहराए
बालियाँ गेहूँ की इठलाए
पाप-बुराई का दहन होलिका
नारद, भविष्य पुराण बताएं
हिरण्यकश्यप की बहन होलिका
अग्नि मंडप का खेल रचाए
बैठ गई संग भक्त प्रभू के
खुद ही जलकर भस्म हो जाए
प्रहलाद वह भक्त प्रभू का
बुराई का अंत करना बतलाए
बैर-उत्पीड़न की प्रतीक होलिका
प्रेम-प्रतीक को छू भी न पाए
शिव-गण भोले बारात ले जाएं
कारण होली हर वर्ष मनाए
कृष्ण ने पूतना को मार गिराया
ग्वाले-गोपियों ने रंग उड़ाया
धुलिवंदन संग होली मनाया
प्रकृति का यौवन भी रंग लाया
धार्मिक निष्ठा और मनोरंजन है
भारतीय समाज का यह संगम है
ईष्या-द्वेष सब मिट जाते हैं
बिछड़े बन्धु जन मिल जाते हैं
अद्भुत ऋतु गाथा बतलाता
रितेश सभी संग होली मनाता ।।
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