मेरी कलम से........(जीवन ???)
जीवन के है रूप अनेक
उन रूपों में मनुष्य है एक
कर्म धर्म है उसके साथी
हर राह का साथ निभाते
उसका पथ बड़ा विचलित है
दुख सुख का संगम निहित है
गिरना उठना,उठकर चलना
उसको है परिपक्व बनाता
अकेला वो चल न पाता
संगीनी का साथ वो चाहता
किस्सा है ये बड़ा पुराना
आदम ईव के पास से आया
दो जान एक जीव बनाया
जीवन चक्र को फिर से चलाया
नए जीव ने भी गुल है खिलाया
मनोरंजक जीवन को बनाया
कहत रितेश सुनो एक बात
मनुष्य ईश्वर की सुन्दर काठ ।।
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