आज मैं, क्या हूं और कैसा हूं ? यह हमेशा आपने भी जाना और मैनें भी। लेकिन ‘कल’ यानी कि भविष्य को लेकर जब मेरा दिल और दिमाग चिंतित हुआ तो मैनें ब्लाग लिखना शुरू किया। मेरा उद्देश्य मात्र इतना ही रहा कि मैं जो आज लिख रहा हूं वो कल और बेहतर हो और मुझे मेरा आइना दिखा सके। क्योंकि मेरा लिखा हुआ हर ‘कल’ (मेरा ब्लाग) मेरे आज को बेहतर करेगा। इसलिए आप मेरे ‘कल’ से जुड़ें ताकि भविष्य में जब हम मिलें तो मैं आपकी पहचान से वाकिफ रहूं और मेरी पहचान से आप।
Friday, March 27, 2015
क्या खास है तुझमें
मैं और मेरे यार......
जीवन
मेरी कलम से........(जीवन ???)
जीवन के है रूप अनेक
उन रूपों में मनुष्य है एक
कर्म धर्म है उसके साथी
हर राह का साथ निभाते
उसका पथ बड़ा विचलित है
दुख सुख का संगम निहित है
गिरना उठना,उठकर चलना
उसको है परिपक्व बनाता
अकेला वो चल न पाता
संगीनी का साथ वो चाहता
किस्सा है ये बड़ा पुराना
आदम ईव के पास से आया
दो जान एक जीव बनाया
जीवन चक्र को फिर से चलाया
नए जीव ने भी गुल है खिलाया
मनोरंजक जीवन को बनाया
कहत रितेश सुनो एक बात
मनुष्य ईश्वर की सुन्दर काठ ।।
गुलाब.......॥
ओ रे लाल गुलाब........॥
ओ रे लाल गुलाब
तेरे चर्चे लाख हजार
तू है भी लाजवाब
तेरे बढते जायें दाम
हर भंवरा यूं मंडराये
संदेशक उसका बन जाये
फूलों में गुल वो खिलाये
इतना क्यों तू इठलाये
माना रंग तेरा अलबेला
और रूप तेरा रंगीला
तुझसे दुनिया रंगीन है
तू दिलवालों का गीत है
हर मौसम की जरूरत है
तेरी रंगत की रौनक है
कुदरत तुझसे रंगीन है
तू सुन्दर उसकी देन है
उस कुदरत के हम भी करिश्में है
इसलिए उसकी हर रंगत समझते है
Wednesday, March 4, 2015
(होली)................................!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
राग-रंग संग होली लाई
वसंत पंचमी ने पुकार लगाई
फा़ग-धमार ने साज सजाई
खेतों में सरसों लहराए
बालियाँ गेहूँ की इठलाए
पाप-बुराई का दहन होलिका
नारद, भविष्य पुराण बताएं
हिरण्यकश्यप की बहन होलिका
अग्नि मंडप का खेल रचाए
बैठ गई संग भक्त प्रभू के
खुद ही जलकर भस्म हो जाए
प्रहलाद वह भक्त प्रभू का
बुराई का अंत करना बतलाए
बैर-उत्पीड़न की प्रतीक होलिका
प्रेम-प्रतीक को छू भी न पाए
शिव-गण भोले बारात ले जाएं
कारण होली हर वर्ष मनाए
कृष्ण ने पूतना को मार गिराया
ग्वाले-गोपियों ने रंग उड़ाया
धुलिवंदन संग होली मनाया
प्रकृति का यौवन भी रंग लाया
धार्मिक निष्ठा और मनोरंजन है
भारतीय समाज का यह संगम है
ईष्या-द्वेष सब मिट जाते हैं
बिछड़े बन्धु जन मिल जाते हैं
अद्भुत ऋतु गाथा बतलाता
रितेश सभी संग होली मनाता ।।