Friday, March 27, 2015

गुलाब.......॥

ओ रे लाल गुलाब........॥

ओ रे लाल गुलाब
तेरे चर्चे लाख हजार
तू है भी लाजवाब
तेरे बढते जायें दाम
हर भंवरा यूं मंडराये
संदेशक उसका बन जाये
फूलों में गुल वो खिलाये
इतना क्यों तू इठलाये
माना रंग तेरा अलबेला
और रूप तेरा रंगीला
तुझसे दुनिया रंगीन है
तू दिलवालों का गीत है
हर मौसम की जरूरत है
तेरी रंगत की रौनक है
कुदरत तुझसे रंगीन है
तू सुन्दर उसकी देन है
उस कुदरत के हम भी करिश्में है
इसलिए उसकी हर रंगत समझते है

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